नम आंखों से बोले : आज मिला न्याय , अब दरिंदे को जल्दी मिले फांसी

सांभर लेक उपखंड के गांव की घटना : कोर्ट में पीड़िता के गांव के लोग रहे मौजूद , 194 पेज में ठहराया दोषी , 9 पेज में सुनाया दंड

नम आंखों से बोले : आज मिला न्याय , अब दरिंदे को जल्दी मिले फांसी


जयपुर : बनीपार्क सेशन कोर्ट की नई बिल्डिंग की चौथी मंजिल पर गुरुवार सुबह आम दिनों से ज्यादा हलचल रही। यही जिले की पोक्सो कोर्ट है। जिसने सांभर लेक उपखंड में करीब साढ़े 5 माह पहले साढ़े 4 साल की बच्ची के बलात्कार के आरोपी को हत्या के मामले में सजा सुनाई थी। कोर्ट के बाहर मासूम बच्ची के पिता , अन्य रिश्तेदार गांव और मुखिया और अन्य ग्रामीण मौजूद थे। कोर्ट में दोपहर 3:26 पर दोषी सुरेश को कड़ी पुलिस सुरक्षा में पेश किया। कोर्ट ने सुरेश को 3:33 पर सजा सुनाई। 

Read also... अब 'भूल भुलैया' से भिड़ेगी राजामौली की आरआरआर

पोस्को कोर्ट के जज संदीप कुमार शर्मा ने सुरेश को पोक्सो एक्ट और आईपीएस की धारा में मृत्युदंड के साथ अलग-अलग धाराओं में ₹100000 का जुर्माना भी लगाया है। जैसे ही सुरेश को फांसी की सजा सुनाई गई , पीड़िता के पिता की आंखों में आंसू आ गए। वे बोले आज मेरी बच्ची को न्याय मिला, लेकिन जब इसे फंदे से लटकाया जाएगा तब न्याय पूरा होगा। 


सांभर लेक उपखंड के एक गांव में 11 अगस्त की रात को साढ़े 4 साल की मासूम बच्ची लापता हो गई थी। जिसका शव उसी रात को पास के एक तालाब में मिला था। इससे पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया था। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक जयपुर ग्रामीण शंकर दत्त शर्मा ने अपराधी को पकड़ने के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र यादव के सुपर विजन में एसआईटी का गठन किया। करीबन 15 घंटे में पुलिस ने सुरेश बलाई को गिरफ्तार कर लिया  

सबूतों के साथ 13 दिन में कोर्ट में चालान पेश कर दिया गया। मामले में एफ एस एल टीम ने महत्वपूर्ण सुराग जुटाए। दोषी सुरेश ने खुद को बचाने के लिए अपने कपड़े जला दिए थे। बच्चे को भी पानी में डुबो दिया था। इसके बाद भी एफएसएल टीम ने नई तकनीक एवं वैज्ञानिक तरीकों से जांच करते हुए राख और कपड़ों के डीएनए के अंश उठाएं। सुरेश के वकील ने दोषी की उम्र और पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए कोर्ट से रहम की अपील की थी। 

Read also... दो बालिकाओं को अमेरिका दंपतियों ने लिया गोद

जिस पर कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा कि रिमांड के लिए पेश करने के लिए दोषी ठहराया जाने तक अभियुक्त को अपने किए अमानवीय घृणित कृत्य के लिए चेहरे पर लेश मात्र भी पछतावा या पश्चाताप नहीं दिखा। कोर्ट ने कहा कि जब उसे अपने करते के लिए पश्चाताप ही नहीं है तो सुधरने की संभावना बिल्कुल नहीं है। 


शरीर के सड़े अंग को काटना जरूरी

कोर्ट ने आदेश में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि दोषी शरीर के उस सड़  हिस्से की भांति हो गया है जो न केवल अपनी उपयोगिता खो चुका है बल्कि उसे समाज में और बने रहने से पूरे समाज को भी खतरा हो गया है अतः उसे समाज से पृथक किए जाने के अतिरिक्त कोई अन्य तरीका शेष नहीं रहा है। 

कांस्टेबल को मिली पहली लीड

घटना के बाद तत्कालीन पुलिस अध्यक्ष जयपुर ग्रामीण शंकर दत्त ने क्षेत्र में पहले लंबे समय तक कार्यरत रहे पुलिसकर्मियों को भी तत्काल बुलाया। क्षेत्र में 5 साल तक नियुक्त रहे कॉन्स्टेबल ताराचंद पूनिया को कोटपूतली से बुलाया गया। इसको अपने मुखबिर से सुरेश के बारे में पहली लीड मिली। जिसकी जानकारी अधिकारियों को दी और उसके घर पर पहुंचा। जहां से पता चला कि सुरेश रात को बुआ के घर चला। जब ताराचंद उसकी बुआ के घर पहुंचा तो वह उसे पहचान नहीं सका तब सुरेश ने अपना नाम महेश बता दिया। जिस चीज के बाद ताराचंद ने अपने मुखबिर से उसकी फोटो ली और फिर से उसकी तलाशना शुरू कर दिया। इसके बाद घटना स्थल से करीब 20 किलोमीटर दूर ज्वार के खेत में सुरेश को पकड़ा। 




एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ