पानी बचाने के लिए खर्च की लाखों रुपए बेकार Lakhs of rupees spent to save water wasted

जल संग्रहण के लिए सरकारी स्कूलों में बनाए गए टांके हुए बेकार। 


पानी बचाने के लिए खर्च किए लाखों रुपए बहा दिए गए

कहीं टूट गई पाइपलाइन तो कहीं क्षतिग्रस्त हो गए टांके


माधोराजपुरा में विद्यालय में अनुपयोगी टांका

पेयजल किल्लत को दूर करने तथा बूंद-बूंद बचाने की दिशा में पूर्ववर्ती सरकार ने वर्षा जल संग्रहण को लेकर विद्यालयों सहित सरकारी भवनों में भूमिगत टांको का निर्माण करवाया था। लेकिन छत से लेकर टाको तक डाले गए पाइप घटिया होने से योजना कारगर सिद्ध नहीं हो पाई।  हालात यह है कि करीब 8 साल में पानी की एक बूंद भी टांको तक नहीं पहुंच पाई। दूसरी और अधिकांश विद्यालयों में टांके भी क्षतिग्रस्त हालत में हैं। 


इससे विद्यार्थियों को योजना का लाभ नहीं मिल पाया। मुख्यमंत्री जल स्वालंबन अभियान के तहत सरकारी भवनों में पेयजल किल्लत मिटाने के लिए तत्कालीन भाजपा सरकार की ओर से भूमिगत टांके बनवाए गए थे। तथा छत से लेकर टाको तक प्लास्टिक के पाइप लगाए गए थे। टांकों को पट्टियों सेठ ढककर हेडपंप नूमा उपकरण लगाया गया था।  जिससे पानी को बाहर निकाला जा सके। 


कस्बे में राजकीय उच्च माध्यमिक, बालिका उच्च माध्यमिक, संस्कृत उच्च प्राथमिक विद्यालय सहित झराना खुर्द, गोपालपुरा, रामसिंहपुरा सहित विभिन्न सरकारी विद्यालयों में लाखों रुपए की लागत से टांके बनवाए गए थे। लेकिन उचित मॉनिटरिंग नहीं होने के अभाव के कारण सभी टांके अनुपयोगी साबित हो रहे। 

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24 घंटे भी नहीं टिक पाया पैच वर्क

रेनवाल रोड पर सड़क से डामर उखड़ गई 

जोबनेर : कस्बे के रेनवाल रोड स्थित भारिजा गांव के समीप मुख्य सड़क पर बने गड्ढों को विभाग द्वारा पैच वर्क के नाम पर डामर डालकर ठीक किया गया। लेकिन सड़क पर लगे यह पेच वर्क 24 घंटे में ही उखड़ गए। स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि बरसात के मौसम में पानी भरने व अब् धूल उड़ने के कारण गौरव पथ पर गौरव तो खंडित हो गया था। 

साथ ही यहां के व्यापारियों इधर उधर से गुजरने वाले राहगीरों व स्थानीय लोगों का धूल उड़ने के चलते जीना भी दुर्बल हो गया था। हालात यह था कि इधर से गुजरने वाले सैकड़ों दुपहिया व चार पहिया वाहन से उड़ने वाली धूल के चलते व्यापारी सोच रहे थे कि प्रतिष्ठानों की सफाई करने से भी क्या फायदा योजना दुकानों में धूल जम जाती थी। आखिर लंबे इंतजार के बाद विभाग ने इसकी सुध ली व सड़क को जहां से क्षतिग्रस्त थी वहां डामर डालकर ठीक किया। 

लेकिन यह डामर 24 घंटे भी नहीं रह पाई। गौरव पथ को बने लगभग 3 वर्ष से अधिक हो चुका है और 3 वर्ष में यह तीसरी बार टूट गया है। उल्लेखनीय है कि लगभग 3 वर्ष पूर्व रेनवाल रोड पर बने गौरव पथ में बरसात के मौसम में पानी के चलते इतने गड्ढे हो गए थे कि गौरव पथ गड्ढों में तब्दील हो गया था ऐसे में इस सड़क पर तेजी से निकलने वाले वाहन से हमेशा दुर्घटना का भय रहता था। 

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