If Pakistan provokes, India can get a befitting reply. पाकिस्तान ने उकसाया तो भारत से मिल सकता है मुंहतोड़ जवाब।

 पाकिस्तान ने उकसाया तो भारत से मिल सकता है मुंहतोड़ जवाब। 



विश्व में तनाव की वजह बन सकता है भारत-पाक में संघर्ष। 

पाकिस्तान की ओर से उकसाने वाले किसी भी कार्यवाही का अब भारत मुंहतोड़ जवाब दे सकता है। यह दावा अमेरिका के खुफिया विभाग के एक समूह है। 'इंटेलिजेंस कम्युनिटी ' ने अमेरिकी संसद को सौंपी गई रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान की प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष भड़काने वाली कार्रवाई का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेतृत्व में भारत पहले की तुलना में अब अधिक सैन्य ताकत से जवाब दे सकता है। 
ऑफिस ऑफ द डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस की वार्षिक एसेसमेंट रिपोर्ट में कहा गया है। हालांकि भारत और पाकिस्तान के बीच पारंपरिक युद्ध होने की संभावना ना के बराबर है। फिर भी दोनों देशों के बीच संघर्ष और तनाव और बढ़ने की आशंका है। कश्मीर या भारत में आतंकी हमलों की आशंका दोनों परमाणु शस्त्र संपन्न देशों के बीच संघर्ष को भड़काने का बिंदु बन सकती है। यह शेष विश्व में तनाव की वजह बन सकता है। 

भारत-चीन सीमा पर गहरा तनाव। 


अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत चीन सीमा पर सैनिकों की कुछ हद तक वापसी के बावजूद तनाव गहरा बना हुआ है। चीन ने अपनी ताकत का प्रदर्शन करने के लिए पूरी सरकार को झोक रखा है। और क्षेत्रीय पड़ोसियों को दबाना चाहता है। जिसमें विवादित क्षेत्रों पर इसके दावे भी शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है। मई 2020 के बाद से चीन से जुड़े सीमावर्ती क्षेत्रों में टकराव की स्थिति बनी हुई है। 1975 के बाद से भारत चीन के बीच पहली बार घातक सीमा संघर्ष हुआ। दोनों देशों ने कुछ हद तक सेना पीछे हटाई है। लेकिन तनाव बना हुआ है। 

पाकिस्तान के साथ सैन्य सहयोग समिति। 

भारत को विश्वसनीय साथी बताते हुए रूस ने बुधवार को कहा कि दोनों देशों के बीच कोई मतभेद या गलतफहमी नहीं है। 
स्वतंत्र संबंधों के आधार पर पाकिस्तान के साथ रूस का सीमित सैन्य सहयोग है। 
जो आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को आगे बढ़ाने तक सीमित है। नई दिल्ली में बुधवार को रूसी मिशन के उप प्रमुख रोमन बाबूश्किन के साथ एक संयुक्त मीडिया ब्रीफिंग में रूसी राजदूत निकोले  ने भारत वह पाकिस्तान द्वारा नियंत्रण रेखा पर 2003 के युद्ध विराम का पालना करने की हालिया प्रतिबद्धता का स्वागत किया और कहा कि यह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बहुत महत्वपूर्ण कदम है।  

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