Asia's largest sheep breeding center will be closed

 बंद होगा एशिया का सबसे बड़ा व प्रदेश का इकलौता भेड़ प्रजनन केंद्र।



 Asia's largest sheep breeding center will be closed

31 मार्च से तीनों केंद्रों पर ताला लगाने की तैयारी, स्टाफ को स्थानांतरण करने की कवायद। 

कृषि कानूनों के विरोध के बीच राज्य सरकार पशु पालकों को झटका देने की तैयारी कर रही है। सरकार पशुपालकों की सुविधा के लिए 46 वर्ष पहले फतेहपुर में स्थापित किए गए प्रदेश के एकमात्र भेड़ प्रजनन केंद्र को बंद कर रही है। 
वही लाडनूं स्थित भैंस प्रजनन केंद्र अलवर के शुकर फार्म पर भी 31 मार्च से पहले ताले लगाने की तैयारी कर रही है। 
हाल ही हुई उच्च स्तरीय बैठक में भेड़ प्रजनन केंद्र अधिकारियों से संपत्ति का विवरण मांगा है। 
निदेशालय पशुपालन विभाग जयपुर के निदेशक डॉ वीरेंद्र सिंह ने शुक्रवार को इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। 
केंद्र के अनुपयोगी, एवं उपयोगी संसाधनों, चारा, दाना एवं अन्य सामानों को जिला स्तरीय कार्यकाल में भिजवाने व स्टाफ को समायोजित करने के लिए कमेटी का गठन किया गया है। 
यह कमेटी 8 मार्च तक प्रक्रिया पूरी करेगी इसके बाद तीनों फर्म बंद कर दिए जाएंगे। 
यहां इनकी नस्ल सुधार पर कार्य हो रहा था। यहां के पशुपालकों को मेढे व
 बकरों की उन्नत नस्ल मिल रही थी
इसे बंद करने की कवायद कई सालों से चल रही थी। सूत्रों की माने तो स्थानीय अधिकारियों ने उच्च अधिकारियों व मंत्री तक सही रिपोर्ट नहीं भेजी। ऐसे में सरकार ने इसे बंद करने का फैसला कर लिया है। 
फतेहपुर में स्थित फार्म पर स्टाफ के वेतन के अलावा नाम मात्र का खर्च आ रहा है। 

1973 में केंद्र ने की थी स्थापना। 

क्षेत्र के पशुपालकों को फायदा पहुंचाने व उन्नत नस्ल के बकरे तैयार करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने 1973 में फतेहपुर मैं राजस्थान का पहला भेड़ प्रजनन केंद्र शुरू किया था। 
केंद्र सरकार ने अपनी जमीन वह अपने बजट में भवन बनाकर इसके अंदर की शुरुआत की थी। 
रूस की मेरिनो नस्ल के मेढे प्यार करने के लिए देश में सिर्फ इसी केंद्र को तैयार किया गया था। इसके बाद हिसार में दूसरा केंद्र बनाया गया था। तब इसी भेड़ प्रजनन केंद्र के मेढ़े भेजे गए थे। 
वर्ष 2000 में इसका संचालन राज्य सरकार को सौंप दिया गया था। 

84 कर्मी का कुनबा, 550 हेक्टेयर जमीन। 

भेड़ प्रजनन केंद्र पर अधिकारियों व कर्मचारियों के 84 पद स्वीकृत है। इनमें से 21 पद पर स्टाफ कार्यरत है वह 63 पद रिक्त है। जब केंद्र शुरू हुआ था तभी 9400 हेक्टेयर भूमि केंद्र के पास लीज पर थी। 
बाद में 7300 हेक्टेयर भूमि बची थी। हाल ही में राज्य सरकार ने अधिकारियों के साथ हुई बैठक के बाद 550 हेक्टेयर भूमि केंद्र के अधीन रखी गई शेष वन विभाग को सौंप दी गई। 


केंद्र को बंद नहीं होने देंगे। अगर कोई आदेश आया तो मुख्यमंत्री व पशुपालन मंत्री से बात करके पक्ष रखूंगा इसके अंदर के पशुपालकों को काफी फायदा मिल रहा है   विधायक फतेहपुर




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